Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
अरुद्धश्च पदार्थौघैः स्वयं स्वानुभवोन्मुखः ।
व्यवहर्ता तथाभूतैरेवं पुंभिर्मनोमयैः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
अपने अनुभव की ओर उन्मुख हुआ मैं यानी स्वानुभवरूप
मैं स्वयं भी पदार्थसमूहों से अवरुद्ध नहीं होता था । हे श्रीरामचन्द्रजी, इस तरह मैं स्वप्नमनोराज्य
के समान मनोमय भूतों के साथ ही व्यवहार करता था