Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
एवं व्योमपिशाचोऽहं संपन्नो रघुनन्दन ।
मयानुभूता काप्येषा देवागारपिशाचता ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे रघुनन्दन, इस तरह मैं आकाशका
पिशाच हो गया ओर देवताओं के घरों मे इस एक अनिर्वचनीय पिशाचता का मैने अनुभव किया