Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
पिशाचाः सन्तिलोकेस्मिन्किमाकाराःकिमास्पदाः ।
किंजातीयाः किमाचाराः कीदृशाः कीदृशाशयाः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन्, कृपाकर यह बतलाइये कि इस लोक में पिशाच किस
आकार के होते हैं, वे कहाँ रहते हैं, किस जाति के होते हैं, उनका आचार कैसा होता है तथा वे
किस तरह के अभिप्रायवाले होते हैं ?