Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
आकाशसदृशाः केचित्केचिन्नीहारसंनिभाः ।
केचित्स्वप्ननराकाराः साकारा अपि स्वात्मकाः ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
इनमें कोई आकाश के सदृश, कोई नीहार (कुहरा) के तुल्य और कोई स्वप्न काल के मनुष्यों
के आकार के समान आकारवाले साकार होते हुए भी शून्यात्मक होते हैं