Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
केचिदभ्रदलप्रख्याः केचित्पवनदेहकाः ।
केचिद्भ्रमात्मका एव सर्वे बुद्धिमनोमयाः ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
कोई मेघखण्ड के
समान, कोई वायुमय देहवाले और कोई प्राणी की भ्रान्ति के अनुसार देहधारी होते हैं । हे
श्रीरामचन्द्रजी, ये सबके सब बुद्धि-मनोमय ही होते हैं