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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

उत्तिष्ठ सिद्धलोकेषु निवसावो यथास्थितम् । स्वास्पदस्थितयः सौम्याः स्वात्मसिद्धौ सुसाधनम् ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

अब उठिये, हम दोनों सिद्ध लोको में पूर्ववत्‌ निवास करें-आप नन्दनवन में चलकर विहार कीजिये और मैं सप्तर्षिलोक में जाकर रहूँ । विना हलचल के अपने स्थान में रहना अपनी विक्षेपशून्य स्थिति के लिए उत्तम साधन है