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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

इति निर्णीय तावुच्चैरुत्सृतौ तारकोपमौ । सममेकपुटोड्डीनौ व्योम यन्त्रोपलाविव ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, ऐसा निर्णय कर तारों के सदुश वे दोनों सिद्ध गुलेल से उड़े हुए दो पत्थरों के समान एक साथ बड़ी तेजी से उड़े