Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 45
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 45
संस्कृत श्लोक
स एव कथ्यते ब्रह्मा सकल्पाकाशरूपवान् ।
असदेवासतो बीजं जगतो विगताकृतिः ॥ ४५ ॥
हिन्दी अर्थ
वह मनरूप जो जीव है वही समष्टिरूप से संकल्पाकाशरूपधारी ब्रह्मा कहलाता है ।
असद्रूप इस जगत् का बीज भी एकमात्र असद्रूप ही है, उसकी कोई आकृति नहीं है