Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 47
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
पृथ्व्यादिमूर्तिरहितस्त्वातिवाहिकदेहवान् ।
पृथ्व्यादयः किल कुतः संकल्पपुरुषस्य खे ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
पृथ्वी
आदि पंचभूतों की मूर्ति से रहित होने पर वह ब्रह्मा सूक्ष्म शरीर से सम्पन्न है । हे श्रीरामचन्द्रजी,
आप ही सोचिये कि आकाश में संकल्पपुरुष के पृथ्वी आदि कहाँ से हो सकते हैं