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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 48

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 48

संस्कृत श्लोक

भवन्मनो यथाकाशपुरं पश्यति कल्पितम् । तथा मनोविरञ्चित्वं पश्यत्यात्मनि कल्पितम् ॥ ४८ ॥

हिन्दी अर्थ

आपका मन जैसे आकाश में कल्पित नगर का अवलोकन करता है, वैसे ही अपने में कल्पित विरंचि (ब्रह्मा) रूपता का भी अवलोकन करता है