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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 56

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 56 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 56

संस्कृत श्लोक

वेत्ति भूतमयत्वं तन्मिथ्यैव न तु वास्तवम् । तथा यथा त्वं संकल्पपुरुषस्य सतोऽसतः ॥ ५६ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, जैसे आप अपने संकल्पपुरुष में तथा असत्‌ होते भी सद्रूप नगर आदि में पृथ्वी आदि पंचभूतमयता देखते हैं वैसे ही ब्रह्माजी भी इन दोनों में भूतमयता देखते हैं । परन्तु वह भूतमयता मिथ्या ही है, वास्तविक नहीं है