Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 59
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 59
संस्कृत श्लोक
स स्वयं चिन्मयाकाशः स संकल्पश्चिदम्बरम् ।
अतः स्वप्नो जगत्सर्वं कृतौ नाशोद्भवौ स्थितौ ॥ ५९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे वह
ब्रह्मा स्वयं चिन्मयाकाश ही हैं वैसे ही परमार्थतः उनका संकल्प भी चिदाकाशरूप ही है । अतः यह
समस्त जगत् उस ब्रह्मदेव का एक स्वप्न है तथा उनके संकल्पजनित इसके नाश ओर प्रादुर्भाव भी
दोनों स्वप्न के तुल्य स्थित हैं