Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 58
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 58 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 58
संस्कृत श्लोक
यथा त्वसत्य एवायं संकल्पः सत्य एव ते ।
तथासावात्मसंकल्पं सत्यमेवानुभूतवान् ॥ ५८ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे आपने अपने असत्य संकल्प को सत्यरूप ही अनुभव किया