Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 61
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 61 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 61
संस्कृत श्लोक
एवं स्थिते जगज्जालं तन्मनोराज्यमुच्यते ।
तच्च शून्यं निरालम्बमाकाशकचनं चिति ॥ ६१ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसी स्थिति में यह समस्त जगत् सत्य उस ब्रह्मदेव का एकमात्र मनोराज्य ही कहा जाता
है और यह सब चिति में निरालम्ब शून्य आकाश का स्फुरणरूप ही है