Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 62

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 62 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 62

संस्कृत श्लोक

यथा स्वप्नपुरं व्योम संकल्पाद्रिर्यथा नभः । तथा ब्रह्म जगच्चैव खमेवाच्छमनाकृति ॥ ६२ ॥

हिन्दी अर्थ

जिस प्रकार स्वप्न का नगर चिदाकाशरूप है जैसे संकल्प का पर्वत चिदाकाश स्वरूप है वैसे ही ब्रह्मदेव का यह जगत्‌ निराकार स्वच्छ चिदाकाशरूप ही है