Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 65
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 65 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 65
संस्कृत श्लोक
तत्किमर्थमनर्थाय निरर्थकमपार्थकाः ।
कस्मादभ्युदिता ब्रूहि रागद्वेषभयादयः ॥ ६५ ॥
हिन्दी अर्थ
किये यह निरर्थक
संसार क्यों अनर्थ के लिए उदित हुआ है ? बिना किसी मतलब के यानी बिलकुल अर्थशून्य
ये राग, द्वेष, भय, रोग आदि क्यों उदित हुए हैं ?