Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
इति वृत्तान्तमखिलमुक्तवानस्मि राघव ।
तवाश्चर्यमयीं पश्य संसृतीनां विचित्रताम् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे राघव, इस प्रकार
पाषाणोपाख्यान एवं सिद्ध का सारा वृत्तान्त मैंने आपसे कह सुनाया । देखिये, संसृतियों की कैसी
आश्चर्यमयी विचित्रता है