Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 72
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 72 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 72
संस्कृत श्लोक
यास्तु गुर्व्यः फलैर्हीनाः शून्याकाराः क्षयक्षताः ।
अशरीराः शरीरिण्यस्ताःपिशाचादिकाः स्मृताः ॥ ७२ ॥
हिन्दी अर्थ
इनमें जो बड़ी, बड़ी वजनदार, कान्ति, प्रकाश आदि फलों से हीन,
शून्याकार, क्षयक्षत, देहाकार से रहित तथा शरीर से युक्त शिलाएँ हैँ वे सब पिशाच आदि कही गई
हैं