Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 84

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 84 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 84

संस्कृत श्लोक

याति तेजस्यनोजस्त्वं तमस्योजःप्रधानताम् । उलूकवत्पिशाचाद्या आश्चर्यं तत्स्वभावतः ॥ ८४ ॥

हिन्दी अर्थ

उल्लू के समान पिशाच आदि अपने स्वभाव से ही प्रकाश में निर्बल हो जाते हैं और अन्धकार में ओज की प्रधानता को प्राप्त हो जाते हैं यानी प्रबल हो जाते हैँ । देखिये, यह कैसा आश्चर्य हे