Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 83
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 83 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 83
संस्कृत श्लोक
अग्नेरादित्यचन्द्रादेस्तैजसं मण्डलं यथा ।
पिशाचादेरजन्यात्म तामसं मण्डलं तथा ॥ ८३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे हम लोगों के
प्रकाश के लिए अग्नि तथा सूर्य आदि का तैजसमण्डल विद्यमान है वैसे ही पिशाच आदिकों की
व्यवहारसिद्धि के लिए इन्धन आदि से अनुत्पन्नस्वरूप वाला तामस-मण्डल विद्यमान रहता
है