Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 82
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 82 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 82
संस्कृत श्लोक
न निहन्ति च तद्भानुर्न चान्यस्तत्प्रपश्यति ।
स एव चानुभवति पश्य मायाविजृम्भितम् ॥ ८२ ॥
हिन्दी अर्थ
उस अन्धकार
को सूर्य नहीं नष्ट करते और उसको दूसरा कोई देखता भी नहीं है । एकमात्र वह पिशाच ही उसका
अनुभव करता है । हे श्रीरामचन्द्रजी, देखिये माया का विकास कैसा है