Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 81
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 81 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 81
संस्कृत श्लोक
मध्याह्नेपि पिशाचश्चेदजिरे तिष्ठति स्वयम् ।
तत्तस्यान्धं तमस्तत्र संनिधानं करोत्यलम् ॥ ८१ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि मध्याह्नकाल
में धूप से युक्त आँगन में भी पिशाच विद्यमान रहे, तो वहीं पर भी घोर अन्धकार अच्छी तरह
उसकी सन्निधि करता ही है यानी उसके सम्मुख अवस्थित हो ही जाता है