Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 95, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 95, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 95 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
अथ कालेन मे तत्र तस्मिन्नेवातिवाहिके ।
आधिभौतिकता देहे रूढा रूढान्तरेरिता ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके अनन्तर काल पाकर मेरे उसी सूक्ष्म शरीर से आधिभौतिकता प्रादुर्भूत हुई, जो चिरकाल
के अभ्यास से परिणत हुए मन से प्राप्त हुई थी यानी मन में ही प्राप्त की गई