Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 95, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 95, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 95 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
शाम्यन्ति संपरिज्ञाताः सकला दृश्यदृष्टयः ।
यथा मरुनदीवेगवारिग्रहणबुद्धयः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
ये समस्त
दृश्यदृष्टियाँ भली भाँति ज्ञान हो जाने पर ऐसे बिलकुल शान्त हो जाती हैं, जैसे मरूभूमि की नदी
के वेग में जलग्रहण की बुद्धियाँ