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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 95, Verse 25

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 95, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 95 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

महारामायणप्रायशास्त्रप्रेक्षणमात्रतः । एतदासाद्यते नित्यं किमेतावति दुष्करम् ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

महारामायण के सदृश शास्त्रों के एकमात्र अवलोकन से ही यह जीवन्मुक्तत्व सदा प्राप्त किया जा सकता है । इतने में क्या दुष्करता है ?