Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 95, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 95, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 95 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
वातात्समुदितो दृष्टो यैरहं गगनास्पदैः ।
सिद्धैर्वातवसिष्ठाख्यस्तैरहं समुदाहृतः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
तथा
मुझे आकाशवासी जिन सिद्धो ने वायुमण्डल से आविर्भूत हुआ देखा, उन लोगों के द्वारा मैं
वातवसिष्ठ कहा जाने लग गया