Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 95, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 95, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 95 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
व्योमन्यादित्यरश्मिभ्यो दृष्टोऽहं यैर्नभोगतैः ।
वसिष्ठस्तैजस इति लोकेषु प्रथितोऽस्मि तैः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
मुझे आकाशवासी जिन महानुभावं ने आकाश में भगवान् सूर्यदेव की
किरणों से निकला हुआ देखा, उन्होने तैजस वसिष्ठ नाम से मुझे विख्यात किया