Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 95, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 95, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 95 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
यैरविज्ञातवृत्तान्तैर्दृष्टोऽहमजिरोत्थितः ।
वसिष्ठः पार्थिव इति लोकेषु प्रथितोऽस्मि तैः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
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