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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 95, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 95, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 95 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

अथ गीर्वाणगेहेषु संपन्नो व्यवहार्यहम् । यथास्थितसमाचारः स्थितो निःशङ्कचेष्टितः ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

इसके बाद हे श्रीरामचन्द्रजी, उन देवताओं के घरों में सर्वविध शंकाओं से शून्य चेष्टावाला तथा यथास्थित अपने सब आचारं से सम्पन्न मैं सम्भाषण आदि के द्वारा व्यवहारशील हो गया । वहाँ उनके साथ अब मेरा कोई संकोच नहीं रह गया था