Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 96, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 96 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

चिन्मात्रमिदमाकाशमनन्तमजमव्ययम् । महाकल्पसहस्रेषु नोदेति न च शाम्यति ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

चिन्मात्र निर्मल एवं निर्लेप आकाशरूप यह आत्मा नाश रहित, जन्म रहित तथा बुद्धि आदि विकारों से वर्जित हे, अतः हजारों महाकल्पो में भी यह न तो उत्पन्न होता है ओर न विनष्ट ही होता है