Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 96, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 96 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
चिदाकाशो हि पुरुषश्चिदाकाशो भवानयम् ।
चिदाकाशोऽहमजरश्चिदाकाशो जगत्त्रयम् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
जीवरूपी पुरुष चेतनरूप निर्मल आकाश ही है, अतः ये आप चिदाकाशरूप हैं,
भँ अजर चिदाकाशरूप हूँ और ये तीनों जगत् भी निराकार चिदाकाश रूप हैं