Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 96, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 96 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
चिदाकाशं वर्जयित्वा शवमेव शरीरकम् ।
अच्छेद्योऽसावदाह्योऽसौ चिदाकाशो न शाम्यति ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि शरीर में
चिदाकाश न रहे तो वह निर्जीव ही हो जायेगा । यह चिदाकाश काटा नहीं जा सकता, जलाया नहीं
जा सकता ओर न नष्ट ही किया जा सकता है अर्थात् आत्मा छेदन, ज्वलन एवं नाश इन सबका
अविषय है