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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 96, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 96 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

चिदाकाशमहं स्वच्छमनुभूतिरिति स्फुटा । यस्यास्तमागता मूढं तं जीवन्तं शवं विदुः ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

मैं चिदाकाशरूप स्वच्छ ब्रह्मात्मा हूँ, इस तरह का विस्पष्ट अनुभव जिस पुरुष का नष्ट हो गया हो, वह भले ही जीता हो, लेकिन उस मूढ़ को विज्ञजन मुरदा ही जानते हैं