Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 96, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 96 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
चिन्मात्रं शुद्धमात्मानं योऽवलम्ब्य स्थिरः स्थितः ।
नाधयस्तं विलुम्पन्ति महोपलमिवेषवः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
चिन्मात्ररूपी विशुद्ध आत्मा को पकड़कर जो
पुरुष अचल बनकर स्थित है, उस महापुरुष को मानसिक पीड़ाएँ उस तरह छिन्न-भिन्न नहीं
करतीं, जिस तरह महापाषाण को बाण