Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 96, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 96 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

चित्त्वं स्वभावं विस्मृत्य बद्धास्था ये शरीरके । तैः सुवर्णं परित्यज्य गृहीतं भस्म वस्तुतः ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

जो पुरुष अपने चेतन स्वभाव को भूलकर तुच्छ शरीर में आस्था बोधकर बैठे हैं, उन्होने असली सोने को छोड़कर राख को ही सोना समझकर ग्रहण किया है, यही वास्तव में जानना चाहिए