Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 96, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 96 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
बलं बुद्धिश्च तेजश्च देहोऽहमिति भावनात् ।
नश्यत्युदेत्येतदेव चिदेवाहमिति स्थितेः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
मैं देहरूप ही हूँ, इस भावना से पुरुष का
बल, बुद्धि और तेज नष्ट हो जाता है और मैं चेतनात्मा ही हूँ, इस ज्ञाननिष्ठा से उसका बल, बुद्धि
और तेज उत्तरोतर बढता जाता है