Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 96, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 96 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
चिदाकाशमहं शुद्धं के मे मरणजन्मनी ।
एवं स्थिते स्युः किंनिष्ठा लोभमोहमदादयः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
मैं आकाश के सदृश अतिस्वच्छ विशुद्ध परमात्मारूप हूँ,
मेरे जन्म-मरण ही क्या ? इस प्रकार की निष्ठा हो जाने पर पुरुष में लोभ, मोह आदि दोष रहेंगे
ही कहाँ, क्योंकि वे आत्मा में तो रहते नहीं, इसलिए ज्ञानी पुरुष की वे क्या क्षति पहुँचायेंगे ?