Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 96, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 96 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
अहो नु मुग्धता ज्ञानदृष्टीनां यद्विदन्त्यलम् ।
शरीरशकलाभावे नश्याम इति मोहिताः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, बड़ा ही आश्चर्य का विषय है कि पण्डितो को भी मोह-व्यामोह देखा जाता है,
इसीलिए वे शरीररूपी एक जड टुकड़े का नाश उपस्थित हो जाने पर हम नष्ट हो रहे हैं, यों मोहित
होकर जोर से चिल्लाने लग जाते हैं