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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, Verse 32

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 96, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 96 · श्लोक 32

संस्कृत श्लोक

इदं चेतनमेवाहं नाहं देहादिदृष्टयः । इति निश्चयवान्योऽन्तर्न स मुह्यति कर्हिचित् ॥ ३२ ॥

हिन्दी अर्थ

यह सदा अपरोक्षरूप चेतनरूप ही मैं हूँ, देह आदि दृश्यरूप मैं नहीं हूँ, इस प्रकार के निश्चय से जिस पुरुष का अन्तःकरण पूर्ण है, वह महात्मा कहींपर भी मोह में नहीं फँसता