Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 97, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 97, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 97 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
तस्मात्स्वनिश्चये यस्मिन्यः स्थितः स तथा ततः ।
अवश्यं फलमाप्नोति न चेद्बाल्यान्निवर्तते ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए जिस किसी अपने निश्चय में दृढ़रूप से स्थित जो भी कोई हो,
वह यदि चपलतावश उस निश्चय से हटे नहीं, तो उस उस निश्चय के अनुसार अवश्य फल प्राप्त
कर सकता है । अथवा अज्ञान के कारण अपने अभीष्ट निश्चय से न हटे, तो निश्चयानुसार अवश्य
फल पाता है । इससे जब तक अज्ञान रहता है , जब तक अनेक सिद्धान्त सत्य हैं, अज्ञान के हट
जाने पर आत्मज्ञान काल में तो आत्मा ही सत्य ठहरता है, दूसरा नहीं