Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 97, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 97, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 97 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
विचार्य पण्डितैः सार्धं श्रेष्ठवस्तुनि धीमता ।
स रूढो निश्चयो ग्राह्यो नेतरत्र यथा तथा ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
इसीलिए अविचारों से जिस किसी का सिद्धान्त मान लेना अच्छा नहीं; यह कहते हैं ।
भद्र, बुद्धिमान् पुरुष को सबसे पहले श्रेष्ठ वस्तु के विषय में विद्वानों के साथ विचार विमर्श कर
लेना चाहिए, दूसरे जैसे तैसे निश्चय को ग्रहण नहीं करना चाहिए