Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 97, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 97, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 97 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
संभवत्युत्तमप्रज्ञः शास्त्रतो व्यवहारतः ।
यो यत्र नाम तत्रासौ पण्डितस्तं समाश्रयेत् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
श्रेष्ट पण्डित का लक्षण कहते हैं /
अध्ययन और सदाचरण से जिस देश में जो भी उत्तम बुद्धि से युक्त हो, उस देश में वही
पण्डित है, उसीका आश्रय लेना चाहिए