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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 97, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 97, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 97 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

सतां विवदमानानां सच्छास्त्रव्यवहारिणाम् । यः समाह्लादकोऽनिन्द्यः स श्रेष्ठस्तं समाश्रयेत् ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

भद्र, सत्शास्त्र के अनुसार व्यवहार करनेवाले, तत्त्वबोधार्थवाद करनेवाले सज्जन पुरुषों के मध्य में जो भी सर्वश्रेष्ठ आह्वादकारक तथा निन्दनीय निषिद्ध आचरणों से रहित हो, वह पण्डित है, बुद्धिमान्‌ उसीका अवलम्बन करें