Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 97, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 97, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 97 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
सर्व एवानिशं श्रेयो धावन्ति प्राणिनो बलात् ।
परिनिम्नं पयांसीव तद्विचार्य समाश्रयेत् ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
तव क्या अन्य श्रेष्ठ।निश्वयों में।निष्ठा रखना।निष्फल है, इस प्रश्न का नकारात्मक उत्तर देते हैं /
भद्र, सभी पुरुष रात दिन जोर-शोर से अपने निश्चय के अनुसार माने गये अभीष्ट पदार्थ की
ओर ऐसे ही दौड़ते हैं जैसे कि नीचे की ओर जलराशि दौड़ती है । और उसे प्राप्त करते हैं, परन्तु
उनमें परम पुरुषार्थं का साधन कौन है, इसका विचार कर सत्शास्त्र एवं सद्गुरुका पुरुष को
आश्रय लेना चाहिए