Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 97, Verse 46
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 97, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 97 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
मानुषेषु च राजानो मुनयो ब्राह्मणोत्तमाः ।
जीवन्मुक्ताः संभवन्ति विरलास्तु रघूद्वह ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
रघुकुल श्रेष्ठ, मनुष्यों में राजा, मुनि, उत्तम ब्राह्मण जीवन्मुक्त होते हैं, परन्तु ये दुर्लभ हैं यानी
लाखों करोड़ों राजा आदि में कोई बिरले जीवन्मुक्त पुरुष उत्पन्न होते हैं