Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 98, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 98, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 98 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
चन्द्रबिम्बोपमाकारा दारा इव गुणाकराः ।
यशःपुष्पामलदिशो भाविसत्फलहेतवः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
यशरूपी फूलों से सारी दिशाओं को निर्मल बनानेवाले, भावी
उत्तम फल के हेतु तथा कोकिल के सदृश मधुरभाषण करनेवाले साधु पुरुष वसन्त ऋतु जैसे
हैं