Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 98, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 98, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 98 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
तच्च रोधयितुं शक्तास्तटस्थाः साधुपर्वताः ।
आपत्सु बुद्धिनाशेषु कल्लोलेष्वाकुलेषु च ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र,
आपदाओं मे, बुद्धिनाश मे, भूख-प्यास, शोक-मोह, जरा-मरण आदि कल्लोलों मे, व्याकुल देशों
में तथा दुरन्त संकटो में सज्जनो की सन्त ही गति हैं