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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 98, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 98, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 98 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

संकटेषु दुरन्तेषु सन्त एव गतिः सताम् । एभिश्चिह्नैरथान्यैश्च ज्ञात्वा तानुचिताशयान् ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामजी, इन लक्षणों से तथा दूसरे पूर्ववर्णित लक्षणों से उन उत्तम अन्तःकरणवाले महात्माओं का परीक्षण कर आप आत्मा में शान्ति प्राप्त करने के निमित्त उनका आश्रय लीजिए, क्योंकि आप संसाररूपी मार्ग में भ्रमण करते करते श्रान्त हो गये हैं