Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 98, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 98, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 98 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
आश्रयेतैकविश्रान्त्यै श्रान्तः संसारवर्त्मना ।
यस्मादत्यन्तविषमः संसारोरगसागरः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र. यह संसारूपी साँपों से भरा हुआ अत्यन्त विषमय सागर सतसंगरूपी
जहाज को छोडकर दूसरे किसी भी जहाज से नहीं पार किया जा सकता, इसलिए सत्संग का
आश्रय लेना ही होगा