Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 98, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 98, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 98 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
अनादृतान्यतद्दोषं तावन्मात्रं समाश्रयेत् ।
गुणान्दोषांश्च विज्ञातुमाबाल्यात्स्वप्रयत्नतः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
गुण और दोषों को जानने के लिए बाल्यावस्था से लेकर अपने आप
प्रयास करना चाहिए, अपने प्रयत्न से ही यथासंभव सत्संग एवं सत्-शास्त्रों से पहले बुद्धि बढ़ानी
चाहिए